Posts

18 स्वदेशी की स्थापना के लिये प्रतिबद्ध आंदोलन

स्वदेशी की स्थापना के लिये प्रतिबद्ध आंदोलन हम सभी जानते हैं कि आज से 500 साल पहले 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को-डी-गामा ने भारत के लिये एक नये समुद्री मार्ग की खोज की और इसी समुद्री मार्ग से पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी और बाद में अंग्रेज हमारे देश में आये और हमें गुलाम बनाया। वास्तव में वास्को-डी-गामा की खोज ने भारत की लूट का एक और मार्ग खोल दिया। उसके बाद अंग्रेजों ने भारत को न केवल लूटा बल्कि उसे अपना गुलाम भी बनाया। सन् 1600 में एक ईस्ट इंडिया कम्पनी और उसके साथ आयी अंग्रेजी फ़ौज ने समूची भारतीय व्यवस्थाओं तथा शिक्षाप्रणाली, आर्थिक व्यवस्था, व्यावसायिक प्रणाली, कृषि प्रणाली एवं सामाजिक व्यवस्था को तोड़कर 300-350 वर्षों तक हमें गुलाम बनाकर अपनी हुकूमत चलाई। उसके बाद गांधीजी के नेतृत्व में आज़ादी की लड़ाई लड़ी गई और लगभग 20 करोड़ की से ज्यादा क्रान्तिकारियों की कुर्बानियाँ देकर हमने आजादी हासिल की। आज फिर से हम गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं। पहले एक ईस्ट इण्डिया कम्पनी आई और उसने 300 साल तक गुलाम बनाये रखा परन्तु आज तो कई हजार बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ हैं, तो कितने साल की गुलामी होगी? आपको श...

17 कुछ फुटकर नुस्खे

कुछ फुटकर नुस्खे शहद :-  शहद सिर्फ स्वाद में ही मीठा नहीं होता अपितु अपने अन्य गुणों में भी यह अतुलनीय है। इसमें अनेक महत्त्वपूर्ण विटामिन, खनिज, हार्मोन्स, अमीनो एसिड और एन्जाइम मौजूद रहते हैं। इसका एक प्राकृतिक गुण यह भी है कि इसके तत्व सीधे हमारे रक्त में पहुंच सकते हैं, इसलिए यह न केवल हमें तत्काल शक्ति प्रदान करता है, बल्कि अनेक बीमारियों से भी हमें बचाता है, साथ ही इससे हमारी पाचन शक्ति भी मजबूत होती है। चिकित्सा की दृष्टि से भी यह हमारे लिये बहुत उपयोगी है। हमारे मस्तिष्क और भावनाओं पर भी इसका चमत्कारी प्रभाव पड़ता है, जिससे मन को शांति मिलती है। तंत्रिका प्रणाली को विश्राम देकर तनाव को कम करता है। गुनगुने पानी में थोड़ा शहद डालकर पीने से अनिद्रा की बीमारी में लाभ होता है। इतना ही नहीं शहद शरीर की प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करता है, जिससे यह हमें अनेक बीमारियों से बचाता हैं दही :-  दही भी ऐसा एक प्राकृतिक भोज्य पदार्थ है, जो हमें बढ़ती उम्र में भी युवा और आकर्षक बनाए रखने में सहायक है। विटामिन ’ए’ और ’बी’, कैल्शियम, लौह, पोटेशियम, फास्फोरस आदि से युक्त दूध से बना होने से ...

16 सौन्दर्य का नाश करता है नशा

सौन्दर्य का नाश करता है नशा नशा, या थोड़ा और व्यापक अर्थ में कहें तो ‘व्यसन’, मनुष्य के मन और शरीर दोनों को ही असुंदर बनाता है। नशेड़ी या व्यसनी व्यक्ति की मानसिक शक्तियाँ कमज़ोर पड़ जाती हैं, स्मरणशक्ति दुर्बल हो जाती है, संकल्प-क्षमता ढीली हो जाती है और विवेक कुंद हो जाता है। व्यसनी व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ परिवार व समाज की भी तबाही का कारण बनता है। शराब, सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू, गुटखा आदि व्यसन के जितने भी रूप हैं, सारे के सारे ही शरीर को जर्जर बनाते हैं और स्थिति ऐसी हो जाती है कि असाध्य क़िस्म के तमाम रोग बिन बुलाए मेहमान की तरह आ धमकते हैं। यह प्रमाणित हो चुका है कि नशा करने वालों का सौन्दर्य धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है। वैज्ञानिक अनुसंधानों ने यह भी अच्छी तरह सिद्ध कर दिया है कि धूम्रपान करने वालों पर बुढ़ापा जल्दी झलकने लगता है। दरअसल धूम्रपान का धुआँ शरीर के अंदर जाकर कुछ ऐसी क्रियाओं को बढ़ावा देता है जिससे त्वचा ढीली और पतली होने लगती है। त्वचा में झुर्रियाँ भी पड़ने लगती हैं तथा कम उम्र में ही बुढ़ापे का शारीरिक झुकाव शुरू हो जाता है। लंदन के सेंट थामस नामक अस्पताल में 50 समा...

15 शीतल पेय भी हैं सौन्दर्य के शत्रु

शीतल पेय भी हैं सौन्दर्य के शत्रु ’लाइफ स्टेटस’ का प्रतीक बन चुके कोका-पेप्सी जैसे शीतल पेय स्वास्थ्य और सौन्दर्य की दृष्टि से धीमे ज़हर ही हैं। शीतल पेय ज़्यादा पीने से होठों व त्वचा का रूखापन तो बढ़ता ही है, बुढ़ापे का आक्रमण भी जल्दी होता है। पर इस ज़माने की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि लोग बेवकूफ़ियाँ करते जाते हैं और तब तक नहीं चेतते जब तक कि पानी नाक से ऊपर नहीं पहुँच जाता। मैक्सिको में पानी सचमुच लोगों की नाक तक पहुँच आया है तो अब वे चेतने और चेताने का ज़ोर-शोर से अभियान शुरू कर रहे हैं। यह अभियान पेप्सी, कोका जैसे विभिन्न ब्रांड के शीतल पेयों के ही ख़्िालाफ़ है। मैक्सिकोवासी और मामलों में भले ही फिसड्डी हों, पर पेप्सी और कोकाकोला जैसे पेय गटकने की बहादुरी में दुनिया भर में अव्वल नम्बर पर रहे हैं। मैक्सिको का आम आदमी साल भर में औसतन 160 लीटर शीतल पेय उदरस्थ कर जाता है। यानि मैक्सिको के लोग नशे की हद तक शीतल पेयों की गिरफ़्त में हैं। नतीजा यह है कि वहाँ के लोगों की खान-पान की आदतें गड़बड़ा गई हैं और काफ़ी लोगों को शीतल पेयों के साइड-इफेक्ट्स झेलने पड़ रहे हैं। पिछले एक साल पूर्व हा...

14 टूथब्रश़: स्वास्थ्य का साधन या रोगाणुओं की सराय

टूथब्रश़: स्वास्थ्य का साधन या रोगाणुओं की सराय हमेशा स्वास्थ्यप्रद आहार-विहार का पालन करने वाले भी अगर अचानक बीमार पड़ जाएं तो हो सकता है कि उन्हें उनकी बीमारी रोज़मर्रा इस्तेमाल होने वाले उन्हीं के टूथब्रश से उपहार में मिल गई हो। जी हाँ, दाँतों, मसूडों को स्वस्थ,सुंदर रखने की मंशा से अपनाया जाने वाला स्वास्थ्य का यह साधन कभी भी बीमारियों की सौग़ात ला सकता है। यह ताज्जुब की बात ज़रूर लग सकती है, पर है एकदम सच। और, यह आश्यर्चजनक खोज की है स्वानंद अनुसंधान पीठम, पुणे के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की एक टीम ने। आज़ादी बचाओ आन्दोलन के यवतमाल (महाराष्ट्र) जिले के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता जितेन्द्र लोड़या और उनके चिकित्सा विशेषज्ञ साथियों की टीम फिलहाल टूथब्रश के नुकसानदेह पहलुओं को काफ़ी गम्भीरता से आमजन के बीच उजागर करने में लग गए हैं। शुरूआती दौर में ही टूथब्रश में पनपने वाली कई बीमारियों के जीवाणु ढूँढ़ निकाले गये हैं। इनमें हैजा जैसे संक्रामक रोगों तक के भी जीवाणु शामिल हैं। सेहत बरक़रार रखने के नाम पर पूरी दुनिया में इस्तेमाल हो रहे टूथब्रश के कई दूसरे नुकसान तो ख़ैर पूरी रिपोर्ट आ जाने के बा...

13 सुन्दरता का शत्रु है साबुन

  सुन्दरता का शत्रु है साबुन दुनिया का शायद ही कोई कोना ऐसा होगा, जहाँ साबुन का साम्राज्य न फैला हुआ हो। आज की पीढ़ी को नहाने के समय साबुन की ज़रूरत कुछ वैसे ही महसूस होती है जैसे कि भूख के समय भोजन की। शायद ही इने-गिने लोग हों जो साबुन के गुलाम न होंगे। आदत तो कुछ ऐसी हो गई है कि अगर एक-दो दिन भी बग़ैर साबुन के नहाना पड़ जाय तो लगता है कि जैसे कई दिनों से शरीर पर पानी ही न पड़ा हो। वास्तव में विज्ञापनी मायाजाल ने साबुन को हमारी अनिवार्यताओं में शामिल कर दिया है। अन्यथा, त्वचा के स्वास्थ्य की दृष्टि से साबुन एकदम गै़रज़रूरी और नुकसानदेह चीज़ है। साबुन में इस्तेमाल किए जाने वाले रसायन तमाम चर्मरोगों के कारण बनते हैं। हालाँकि जैसे-जैसे लोगों की स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है वैसे-वैसे त्वचा के प्रति अहानिकर होने का दावा करने वाले साबुनों की संख्या भी बढ़ने लगी है। कई साबुन निर्माता दावा करते हैं कि उनका साबुन रसायन मुक्त है या जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनाया गया है, परंतु यह अच्छी तरह याद रखना चाहिए कि उच्च से उच्च कोटि के साबुन में भी झाग पैदा करने के लिए कम से कम एक नुकसानद...

12 कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों से सावधान !

    कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों से सावधान ! एक फोटो स्टूडियो वाले ने एक ही साइज़ के फोटो खिंचवाने के तीन रेट लिख रखे थे-10 रु., 20 रु. और 30 रु.। एक ग्राहक ने उत्सुकता जताते हुए पूछा - क्यों जनाब ! एक ही साइज़ के फोटो उतारने के तीन तरह के रेट क्यों लिख रखे हैं? क्या लोग इतने मूर्ख हैं, कि जो फोटो 10 रु. में उतर सकता है, उसके 30 रु. दें? फोटोग्राफर बोला-देखिए महाशय, लोग मूर्ख हैं या बुद्धिमान, इस पर तो मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, पर इतना सत्य जानें कि जब से मैंने स्टूडियो खोला है तब से जितने भी ग्राहक आ रहे हैं, सब खिंचवाते 30 रु. रेट वाला ही फोटो हैं। आज तक कोई 10 रु. या 20 रु. वाला फोटो खिंचवाने को तैयार नहीं हुआ। ग्राहक चकित होकर बोला-क्यों भई ऐसा क्यों? तो फोटोग्राफर ने समझाते हुए कहा- इसकी वजह यह है कि 10 रु. वाला फोटो वैसा उतारा जाता है जैसे कि आप वास्तव में हैं, 20 रु. वाला वैसा उतारा जाता है जैसे कि आप दिखाई देते हैं; और 30 रु. वाला वैसा उतारा जाता है जैसे कि आप दिखाई देना पसन्द करते हैं। दरअसल कोई भी वैसा दिखना नहीं चाहता जैसा वास्तव में होता है या जैसा दिखता है और इस...