05 शरीर और साँसों की बदबू भगाइए
शरीर और साँसों की बदबू भगाइए
शरीर और साँसों में बदबू आने के आंतरिक और बाह्य दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। एक तो खान-पान की गड़बड़ी या किसी रोग की वजह से बदबू आ सकती है, दूसरे शरीर और दाँतों व मुँह की साफ़-सफ़ाई में की जा रही लापरवाही से भी बदबू की समस्या पैदा हो सकती है। बदबू की समस्या के यदि शारीरिक विकार, जैसे कि -दाँतों, मसूड़ों की ख़्ाराबी, पेट की गड़बड़ी, टॉन्सिल की सूजन-पस, नाक व साइनस विकार, श्वासनली व फेफड़ों के विकार, मुँह के छाले, रक्त की कमी, मधुमेह, यकृत-गुर्दों की बीमारी, पीनस आदि कारण हों तो आहार-विहार ठीक रखते हुए आवश्यक उपचार करना चाहिए और यदि बाह्य कारण हों, तो साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखते हुए निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं-
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बेलपत्र, आँवला, हरड़ चूर्ण मिलाकर शरीर में लेप करके कुछ देर बाद धो दें। इससे शरीर और पसीने की दुर्गंध से छुटकारा मिलता है।
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सुपारी, जायफल, शीतलचीनी, कपूर, लौंग तथा लता कस्तूरी को पान में रखकर ज़रा सा चूना लगाकर चबाने से मुख शुद्धि होती है तथा दुर्गंध ख़त्म होती है। यह पान मसूड़े, दाँत तथा जीभ के लिए भी हितकारी है। ध्यान रखने योग्य इतना सा है कि रक्त-पित्त के रोगियों, बहुत दुर्बल, भूखे, प्यासे तथा मूच्र्छा से पीड़ित लोगों के लिये पान सेवन वर्जित है।
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साँस में बदबू आती हो तो ऐसे लोगों को नीम की दातून नियमित करनी चाहिए। इसके अलावा खाने के बाद मुँह अच्छी तरह साफ़ रखें।
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दो चम्मच शहद को 1 गिलास पानी में घोलकर गरारा करने से हफ्ते भर में मुँह की दुर्गन्ध से आसानी से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ दाँत की सफ़ाई और खान-पान पर भी ध्यान दें तो उत्तम है।
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मुँह की दुर्गंध दूर करने के लिए दोनों समय भोजन के बाद अथवा यदा-कदा सौंफ़ चबाना चाहिए। इससे हाज़मा भी दुरुस्त होता है।
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चंदन, मुक्ता, हरड़, नागरमोथा, उशीर व लोध्र का लेप बनाकर शरीर में लगाने से दुर्गंध की समस्या से निजात मिलती है।
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कूठ, हरड़ और नागरपान समान मात्रा में पीसकर पानी के साथ लेप बनाकर शरीर में लगाने से दुर्गंध आनी बंद होती है।
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वच, कूठ, तज, छोटी इलायची, कमल की जड़, नागकेसर सभी सममात्रा में लेकर कपड़छन चूर्ण बनाएं और शहद में मिलाकर 250 मि. ग्रा. की गोलियाँ बना लें।
इन गोलियों को चूसने से मुँह की दुर्गंध दूर होकर सुगंध आने लगती है।
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लोध्र, अनार का छिलका, रीठे के पत्ते, धाय के फूल एक में मिलाकर पीसकर लेप करने से शरीर की दुर्गंध मिटती है
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स्वस्थ, सुन्दर त्वचा के लिए
शरीर की बनावट कितनी ही सुंदर हो, नैन-नक्श कितने ही आकर्षक हों, पर अगर त्वचा रोगग्रस्त हो तो सारी सुंदरता पर ग्रहण सा लग जाता है। हमारे देश में त्वचा को स्वस्थ, सुंदर बनाए रखने के लिए उबटन आदि की प्राचीन परंपरा रही है। कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक स्वदेशी उपायों को अपनाना ही ज़्यादा बेहतर है। इस प्रकरण में त्वचा को स्निग्ध, सुंदर, मुलायम और स्वस्थ बनाये रखने के लिए कुछ घरेलू नुस्ख़े प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इन्हें आज़माकर लाभ उठाया जा सकता है-
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आँवले के चूर्ण का उबटन शरीर पर लगाने से त्वचा साफ़, स्वच्छ तथा मुलायम होती है।
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स्नान से पूर्व एक गिलास पानी में दो चम्मच शहद तथा एक नींबू का रस घोलकर चेहरे और शरीर पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें; इसके बाद स्नान करें। इससे त्वचा की स्निग्धता और चमक बढ़ती है तथा चर्मरोग भी दूर होते हैं।
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जौ, बाजरा तथा चने का आटा, सब 1-1 चम्मच लेकर इसमें 1 चम्मच नींबू का रस तथा 1 चम्मच हल्दी चूर्ण मिलाएं। अब जैतून का तेल इतना लें कि सब गाढ़ा उबटन बन जाए।
इस उबटन को चेहरे पर लगाएं या शरीर में, इससे त्वचा साफ़ और सुंदर बनती है। पूरे शरीर पर लगाना हो तो सभी चीज़ों की मात्रा बढ़ा लेनी चाहिए।
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त्वचा को निरोगी रखने के लिए पानी में नींबू का रस मिलाकर स्नान करना चाहिए।
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पानी में नींबू का रस तथा शहद मिलाकर नियमित पीने से रक्त साफ़ होता है तथा त्वचा रोग नहीं होते।
हालाँकि साँवली त्वचा को एकदम से गोरा बनाने के लिए अभी तक ऐसा कोई नुस्ख़्ाा नहीं बना है, परंतु जो लोग अपनी त्वचा का रंग साफ़ और कांतिमान बनाना चाहते हैं, उन्हें कोई भी उपचार अपनाने से पहले अपना आहार-विहार ठीक करना चाहिए। किसी भी हालत में क़ब्ज़ न होने दें। स्त्रियाँ अनियमित मासिक धर्म और प्रदर आदि की बीमारियों से बचें।
इतने उपाय के बाद 25 ग्राम सौंफ तथा 25 ग्राम कच्चा नारियल दिन में एक बार सबेरे या भोजन के बाद ख़्ाूब चबा-चबाकर नियमित 6 माह तक खाएं। इससे त्वचा में निखार आता है और त्वचा का रंग उजला होता है। गर्भवती महिलाएं पूरे गर्भकाल में यह प्रयोग करें तो संतान गोरी पैदा होती है।
इस आंतरिक प्रयोग के साथ अपने अनुकूल कोई बाह्य प्रयोग भी अपना सकते हैं।
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नींबू और संतरे का रस मिलाकर शरीर और चेहरे पर लगाने से मैल साफ़ होता है तथा रंगत सुधरती है।
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नींबू, आँवला और संतरे का रस दही में मिलाकर चेहरे तथा शरीर की त्वचा पर लगाकर मालिश करें और सूखने पर धो दें या स्नान कर लें। यह त्वचा को निखारने का बढ़िया नुस्ख़्ाा है। कुछ दिन नियमित प्रयोग करें।
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स्नान से कुछ समय पहले लगभग 100 ग्राम मिट्टी किसी कटोरे में पानी डालकर भिगो दें। मिट्टी गल जाए तो मसलकर पानी में एकरस कर लेप सा बना लें तथा इसे शरीर में साबुन की तरह मलकर लगाएं। इसके बाद स्नान करके साफ़ तौलिए से शरीर पोंछ लें। मिट्टी का यह प्रयोग त्वचा को स्वच्छ, मुलायम और चमकीला बनाता है। मिट्टी खेत में साफ़ जगह से एक फुट गहराई से खोदकर लेनी चाहिए।
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रात को जब सोने जाएं तो हाथ-पैर-मुँह आदि को अच्छी तरह धोकर पोंछ लें। इसके बाद ग्लिसरीन, गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाकर ऊपर से किंचित नींबू का रस डाल लें तथा हाथ, पैर और चेहरे पर मलें। इससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है।
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चुकंदर का रस, टमाटर का रस तथा पिसी हल्दी 4:4:1 के अनुपात में मिलाकर मलने से त्वचा का साँवलापन कम होता है।
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घमौरियों से परेशान हों तो बंदगोभी के रस में गुलाबजल मिलाकर लगाएं, राहत मिलेगी।
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दूध की मलाई और टमाटर का रस समान मात्रा में मिलाकर लेप करके लगभग आधे घण्टे बाद धो दें। इससे चेहरे के काले दाग़-धब्बे दूर होंगे।
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गोमूत्र, बेसन, पिसी हल्दी तथा मुलतानी मिट्टी सभी समान मात्रा में लेकर गाढ़ा लेप बनाएं। इसे चेहरे सहित पूरे शरीर पर लगाएं तथा 15 मिनट बाद धोकर गुनगुने पानी से स्नान कर लें। यह प्रयोग निरंतर कुछ दिनों तक करते रहने से शरीर का रंग निखर उठेगा तथा त्वचा कान्तिपूर्ण हो जाएगी।
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कच्चे या गुनगुने दूध में रुई का फाहा भिगोकर चेहरे तथा शरीर के विभिन्न अंगों की त्वचा पर हल्के-हल्के फेरिए। लगभग आधा घण्टा बाद ताज़े या गुनगुने पानी से धो दें। दाग़, धब्बे, झुर्रियाँ मिट जाएंगे तथा त्वचा स्निग्ध रहेगी।
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एक कटोरी में दूध लेकर इसमें चौथाई नींबू निचोड़ दें। जब दूध फट जाए तो इसे चेहरे के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों पर धीरे-धीरे मलें और कुछ देर बाद स्नान कर लें या धो दें। इससे त्वचा में मुलायमियत आएगी और त्वचा कांतिमय हो उठेगी।
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350 ग्राम पानी में 60 ग्राम इमली भिगोकर फूलने दें। तत्पश्चात् उसे मसलकर लेई सा बनाकर शरीर पर मलें और 15-20 मिनट बाद स्नान करें। कुछ दिनों में वर्ण में सुधार होने लगता है। इससे झाँई, दाग़, धब्बे भी ठीक होते हैं। गर्मियों में एक-दो दिन नागा करके तीन-चार सप्ताह तक यह प्रयोग करके देखें।
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यदि बरसात और गर्मी के दिनों में घमौरियों की समस्या से ग्रस्त हों तो बाह्य उपचार के साथ एक गिलास जौ के पानी (बार्ली वाटर) में एक नींबू निचोड़कर पिएं। यदि दिन में दो बार इसे कुछ दिन पिएं तो घमौरियों से जल्दी ही छुटकारा मिल जाएगा।
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जौ हल्का सा भूनकर पीस लें तथा इसमें थोड़ी हल्दी व कुछ बूँदें सरसों का तेल मिलाकर उबटन की भाँति चेहरे तथा शरीर पर लगाएं। त्वचा में धीरे-धीरे निखार आएगा।
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आँवला व सेब का मुरब्बा दोनों का नियमित रूप से प्रात: सेवन करते रहने से त्वचा की ख़्ाुश्की दूर होकर कांतिमान बनती है।
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नागकेसर, कुमुद, कमल के फूल तथा तगर और तालीसपत्र एक में पीसकर लेप करने से त्वचा कांतिमयता आती है।
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तगर की जड़, कूठ और तालीसपत्र को पानी में लेप बनाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है।
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ताज़े पानी में तुलसी की पत्तियाँ तथा गुलाब के फूल की पंखुडियाँ डालकर कुछ देर पड़ा रहने दें। पश्चात् इस पानी से स्नान करें, शरीर में ताज़गी आएगी।
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सर्दी के दिनों में जैतून के तेल में थोड़ा सा नमक मिलाकर शरीर में मालिश करने से त्वचा मुलायम बनती है और यौवन में निखार आता है।
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गाय का गोबर, पीली सरसों, हल्दी, नागरमोथा, कपूर, चिरौंजी, लाल चंदन, छड़ीला, नारंगी का सूखा छिलका-सभी को महीन पीसकर चमेली के तेल में उबटन बनाएं तथा नित्य प्रति चेहरे सहित पूरे शरीर पर मलें। इससे दाग़-धब्बे समाप्त होकर त्वचा सुंदर बन जाएगी।
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नारियल के पानी में मलाई मिलाकर त्वचा पर मलने से दाग़-धब्बे मिटकर त्वचा की मुलायमियत बढ़ती है।
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चंदन पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा की चमक बढ़ती है।
06 स्त्रस्त्रियों की समस्या अविकसित, बेडौल वक्ष
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